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स्वामी नित्यानन्द गिरि, क्रियायोग के आचार्य और क्रियायोग द साइन्स अफ लाइफ फोर्स के प्रणेता एक क्रियावान के प्रश्न का उत्तर दे रहे हैं कि क्या एक क्रियायोग साधक को मन्त्र दीक्षा के आवश्यकता होती है या एक क्रियावान को मन्त्र दीक्षा लेना चाहिए ।
यूट्यूब वीडियो (Youtube Video)स्वामी नित्यानन्द गिरि, क्रियायोग के आचार्य और क्रियायोग द साइन्स अफ लाइफ फोर्स के प्रणेता एक क्रियावान के प्रश्न का उत्तर दे रहे हैं । प्रश्न क्रियायोग अभ्यास में ध्वनि ज्योति स्पन्दन के अनुभव और इस सम्बन्धी साधना को लेकर है। क्या इसको ईश्वर मानना चाहिए? फिर हमारे मस्तिष्क में ईश्वर ओर देवी देवता के बारें में यो धारणा और श्रद्धा है उसका क्या होगा? ध्यान, धारणा, समाधि, स्थूल बस्तु में ध्यान, सूक्ष्म बस्तु में ध्यान, शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गन्ध, सवितर्क, निर्वितर्क, सविचार, निर्विचार, ईश्वर, देवी देवता
यूट्यूब वीडियो (Youtube Video)स्वामी नित्यानन्द गिरि, क्रिया योग आचार्य और क्रियायोग द साइन्स अफ लाइफ फोर्स के प्रणेता क्रियावानों के प्रश्न का उत्तर दे रहे हैं कि साधक को ज्यादातर समय कहाँ धारणा बनाऐ रखना चाहिए, कूटस्थ में या ब्रह्मरन्ध्र में।
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Swami Nityananda Giri, Kriyayoga Acharya and author of the book, Kriyayoga: The Science of Life-force, describes in brief about the vrittis of chitta, types of vrittis, what those vrittis are, for understanding of the Kriyayoga practitioners.
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This is in continuation of the video: चित्त क्या है, चित्त का प्रकार, योग, क्रियायोग, स्वामी नित्यानंद गिरि- https://youtu.be/nGoUf8y9U8Y
Next Video: https://youtu.be/QSpc9i0Y0-0
क्रिया योग में हम कुछ सहायक तकनीकें करते हैं जो नाभि क्रिया, गुरु प्रणाम, खेचरी मुद्रा, हंस साधना, व्यान विक्षण, महामुद्रा, ज्योतिमुद्रा, शांभवी मुद्रा जैसी पूरक और अनुपूरक तकनीकें हैं। लेकिन तकनीक के मूल को क्रिया प्रॉपर कहा जाता है। क्रिया प्रॉपर के अलग-अलग चरण हैं जैसे क्रिया प्रॉपर - 1, क्रिया प्रॉपर - 2, क्रिया प्रॉपर - 3, क्रिया प्रॉपर - 4। क्रिया प्रॉपर को विभिन्न नामों से भी जाना जाता है जैसे क्रिया प्राणायाम, क्रिया कुंडलिनी प्राणायाम इत्यादि। सहायक तकनीकों का वर्णन अंग्रेजी में किया गया है।
क्रिया विधि 1 या मुख्य/कोर क्रिया तकनीक का विस्तार से वर्णन किया गया है और स्वामीजी ने क्रियावानों और साधकों द्वारा पूछे गए कई प्रश्नों के उत्तर विभिन्न वीडियो के माध्यम से दिए हैं। सुविधा के लिए विशिष्ट विषयों के लिए अलग-अलग लिंक यहाँ सूचीबद्ध हैं।
सभी क्रिया योग दीक्षा प्रारंभ संबोधनों का संग्रह
24 February 2024
यूट्यूब वीडियो (Youtube Video)श्रद्धा, प्रयत्न और इन्द्रिय संयम- एक क्रियावान साधक के प्राथमिकता, संशयात्मा का गति विनाश की ओर।
यूट्यूब वीडियो (Youtube Video)पञ्चकोशी परिक्रमा- काशी आदि तीर्थ में और क्रियायोग जैसे आध्यात्म साधना में ।
यूट्यूब वीडियो (Youtube Video)स्थूल शरीर, शरीर त्रय- शरीर रूपी मन्दिर और मन्दिर शैली से शरीर त्रय के सांकेतिक स्वरूप।
यूट्यूब वीडियो (Youtube Video)सूक्ष्म शरीर, शरीर त्रय- एक क्रियावान (योगी) को जानना चाहिए।
यूट्यूब वीडियो (Youtube Video)पञ्चकोश, शरीर त्रय के साथ इनका सम्बन्ध- एक क्रियावान (योगी) को जानना चाहिए।
यूट्यूब वीडियो (Youtube Video)चक्रों के साथ पञ्चकोश और शरीर त्रय के सम्बन्ध- एक क्रियावान (योगी) को जानना चाहिए ।
यूट्यूब वीडियो (Youtube Video)परा, पश्यन्ती, मध्यमा, वैखारी- चार प्रकार के वाक्(वाणी), मन्त्र साधना, क्रिया योग साधना में प्रयोग।
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क्रिया योग के आचार्य स्वामी नित्यानंद गिरि पन्च तन्मात्रा के सम्वध में एक जिज्ञासु के प्रश्न का उत्तर दे रहे हैं। पञ्च तन्मात्रा क्या है? वेदान्त दर्शन के अपञ्चिकृत पञ्च महाभूत हि सांख्य दर्शन के पञ्च तन्मात्रा है, यानि पञ्च सूक्ष्म भूत ।
शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गन्ध के सूक्ष्म रूप। वेदान्त और सांख्य दर्शन में सृष्टि प्रक्रिया के भिन्नता, व्यवहृत शब्द से समझा रहे हैं। यह तन्मात्रा चक्षु, कर्ण, त्वचा आदि इन्द्रियों से जाना नहीँ जाता। एक क्रियावान या योगी ध्यान में इनको जानता सकता है ।
tanmatra, subtle elements, elements before division and inter mixing to form gross elements.
क्रिया योग के आचार्य और क्रियायोग- द साइन्स अफ लाइफ फोर्स के प्रणेता स्वामी नित्यानन्द गिरि कहते हैं कि एक क्रियावान या योगाभ्यासी को पञ्चकोश के बारे में जानकारी रखना चाहिए- अन्नमय कोश, प्राणमय कोश, मनोमय कोश, विज्ञानमय कोश और आनन्दमय कोश। यह सब आत्मा को ढंके रखते हैं। यह पंचकोश के शरीर त्रय - स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर, के साथ सम्बन्ध को दर्शाया गया है।
Previous videos,
1. https://youtu.be/V1V7JiLtYOw
2. https://youtu.be/Usfw1jYh_a0
3. https://youtu.be/0nPJhZ3Q-Os
Watch in English: https://youtu.be/H7P5Tbeowqs
क्रिया योग के आचार्य स्वामी नित्यानंद गिरि क्रियावानों (योगाभ्यासीयों) के लिए शरीर त्रय- स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर के विषय में बता रहे हैं। यहाँ कारण शरीर के वर्णन किया गया है।
योग, योगी, क्रियावान, क्रिया योग, तीनों शरीर को समझाना, स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर, अनिर्वाच्य - ना सत् ना असत्, स्थूल और सूक्ष्म शरीर के कारण, अनादि, अविद्या रूप, निर्विकल्प रूप, अव्याकृत, आनन्दभुक्, प्रकृति, प्राण, सुषुप्ति, सुप्तावस्था, गहन निद्रा, अविद्या, काम, कर्म, कर्म संस्कार, सत् स्वरूप अज्ञान अवस्था।
Previous videos, 1. https://youtu.be/0nPJhZ3Q-Os
2. https://youtu.be/Usfw1jYh_a0
Next video: https://youtu.be/f5cwfjbI9vY
Watch in English- https://youtu.be/3aSf0EPi9Zw
क्रिया योग के आचार्य स्वामी नित्यानंद गिरि क्रियावानों (योगाभ्यासीयों) के लिए शरीर त्रय- स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर के विषय में बता रहे हैं। यहाँ सूक्ष्म शरीर के वर्णन किया गया है।
योग, योगी, क्रियावान, क्रिया योग, तीनों शरीर को समझाना, स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर, अपंचिकृत पंच महाभूत- क्षिति (पृथ्वी), आपः (जल), तेज (अग्नि), मरूत (वायु), व्योम (आकाश); भोग साधन (भोगने का साधन), पंच ज्ञानेन्द्रियाॅ- कर्ण, त्वचा, चक्षु, जिह्वा, नासिका; पंच कर्मेन्द्रियाॅ- वाक्, पाणि, पाद, पायु, उपस्थ; पंच विषय- शव्द, स्पर्श, रूप, रस, गन्ध; पंच प्राण- प्राण, अपान, समान, व्यान, उदान; अन्तकरण- मन, बुद्धि, अहं, अवचेतन; अविद्या, काम,कर्म, स्वप्नावस्था ।
Previous video- https://youtu.be/0nPJhZ3Q-Os
Next video- https://youtu.be/V1V7JiLtYOw
Watch in English- https://youtu.be/Pz5Znt9xmwg
क्रिया योग के आचार्य स्वामी नित्यानंद गिरि क्रियावानों के लिए शरीर त्रय- स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर के विषय में बता रहे हैं। यहाँ स्थूल शरीर के वर्णन किया गया है। शरीर को मन्दिर के साथ तुलना की है। मन्दिर के शैली से तीनों शरीर को सांकेतिक रूप में समझा रहे हैं ओर आत्मा को मन्दिर में स्थापित देवता के रूप में।
योग, योगी, क्रियावान, क्रिया योग, शरीर एक मन्दिर, मन्दिर से तीनों शरीर को समझाना, स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर, पंचिकरण, पंचिकृत पंच महाभूत- क्षिति (पृथ्वी), आपः (जल), तेज (अग्नि), मरूत (वायु), व्योम (आकाश), सप्त धातु- मज्जा, अस्थि, मांस, मेद, शोणित (रक्त), स्नायु, त्वचा (चर्म), षड विकार- अस्ति, जायते (जन्म), वर्धते (वृद्धि), अपरिणमते ( परिवर्तन), अपक्षीयते ( क्षय), विनश्यतीति (विनाश), भोगायतन (भोगने का स्थान), आत्मा, अविद्या, सत् कर्म, जाग्रतावस्था।
Next Video 1.- https://youtu.be/Usfw1jYh_a0
2. https://youtu.be/V1V7JiLtYOw
For watching in English: https://youtu.be/ePAAx8kg8DE
स्वामी नित्यानन्द गिरि, क्रिया योग आचार्य और क्रियायोग- द साइन्स अफ लाइफ फोर्स के प्रणेता महिषासुरमर्दिनी माता भगवती महामाया जगज्जननी दुर्गा दुर्गतिनाशिनी की पूजा के अवसर पर माता रानी के पूजा की क्रियावान साधक के जीवन में आध्यात्मिक वैशिष्ट्य को समझा रहे हैं।
क्रिया योग, प्राण कर्म, महाप्राण, मा दुर्गा, अदिति, देवता, असूर, दैवी गुण, आसुरी गुण, महिषासुर - अहंकार, आध्यात्म युद्ध, महिषासुर के सेनापति सकल - आसुरी प्रवृत्ति सकल, जय माता दी।
क्रियायोग ध्यान में आसन सिद्धि के आवश्यकता, आसन लगाने का परिवेशादि निर्णय।
यूट्यूब वीडियो (Youtube Video)आसन सिद्धि सम्बन्धी योगसूत्र में "प्रयत्नशैथिल्य" शब्द के सहि अर्थ।
यूट्यूब वीडियो (Youtube Video)पञ्च तन्मात्रा क्या है, सूक्ष्म भूत या शव्दादि विषय ? एक क्रियावान (योगी) ध्यान में जानता है।
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Swami Nityananda Giri, Kriyayoga Acharya and author of the book, Kriyayoga- The Science of Life-force speaks on Kriyayoga meditation before initiation ceremony to new Kriyavans at his Rishikesh ashram on 5th August, 2023.
Kriyayoga, Yoga, The state to be achieved. Our real identity and apparent identity, who am I. The game of five sense organs, mind and intellect. Chitta vritti. Meditation on Prana, Dhyana, Dharana, Sukha, Duhkha, Pleasure and sufferings, Cause of sufferings, How to get rid of sufferings?, mind - pure and impure, visaya, objects of mind, Ananda, Bliss state, Knowledge, Jnanam, Prana, Life-force, Chakras
क्रिया योग परम्परागत किसी गुरू/आचार्य से सिखना चाहिए।
स्वामीजी योग शब्द का अर्थ समझाते हैं। अन्य वीडियो में स्वामीजी ने पहले ही युजिर योगे, युज समाधौ, चित्त-वृत्ति निरोध का उपयोग करके योग का अर्थ समझाया है। इस वीडियो में स्वामीजी योग के घटक अक्षरों का उपयोग करके योग का अर्थ समझाते हैं।
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Swami Nityananda Giri, Kriyayoga Acharya and author of the book, Kriyayoga- The Science of Life-force explains Chitta, the mind-stuff, its constituents and Types of Chitta for understanding of the practitioners of Kriyayoga meditation.
Chit, Consciousness; Mana, mind; Buddhi, intellect; Aham, I Sense, Ego principle; Avachetana, subconscious; Muddha chitta, dull mind, Kshipta chitta, wandering mind; Vikshipta chitta, mind focused at times and wandering at other times; Ekagra chitta, focused mind; Niruddha chitta, mind with actions halted, mind in samadhi; Rishi Patanjali; Yogasutras; Mahavatar Babaji.
Also watch the subsequent video: चित्त वृत्ति, वृत्तियों का प्रकार, योग, क्रिया योग, स्वामी नित्यानंद गिरि- https://youtu.be/8QZ4VLWEggY
टिप्पणी: ये प्रारंभिक वार्ताएँ हैं। कृपया अभ्यास करने से पहले क्रिया योग आचार्य से दीक्षा और व्यक्तिगत मार्गदर्शन लें।
क्रिया योग के मूल सिद्धांतों का परिचय (भाग 1)।
यूट्यूब वीडियो (Youtube Video)क्रिया योग की मूल बातों की अगली कड़ी (भाग 2)।
यूट्यूब वीडियो (Youtube Video)इस दो भागीय वीडियो श्रृंखला में स्वामीजी चित्त और चित्त वृत्तियों के बारे में बताते हैं।
A talk in Hindi by Swami Nityananda Giri, Kriya-yoga Acharya on the eve of release of his book, "Kriya-yoga: The Science of Life-force" at Allahabad in Kumbha Mela 2013 by Parama Pujya Swami Kashikananda jee Maharaj in presence of Swami Premananda jee and many other revered monks of India.
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